दिल्ली, मुंबई समेत देश के प्रमुख शहरों में कितने बजे होगा होलिका दहन? नोट कर लें अपने शहर का शुभ मुहूर्त

Citywise Holika Dahan Muhurat 2025: आज होलिका दहन का आयोजन किया जाएगा, और अगले दिन रंगों की होली खेली जाएगी. यह पर्व हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है. होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि इससे नकारात्मकता का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. इसे छोटी होली के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन से ही लोग एक-दूसरे को गुलाल और रंग लगाना शुरू कर देते हैं. इस बार होलिका दहन के दिन भद्रा का साया पड़ रहा है, जिससे लोग शुभ मुहूर्त को लेकर भ्रमित होते नजर आ रहे हैं. यहां हम आपके लिए भद्रा की अवधि और विभिन्न शहरों में होलिका दहन के सही समय के बारे में बता रहे हैं.

शहरवार होलिका दहन का मुहूर्त

नई दिल्ली- रात 11:26 से 12:30 बजे तक

मुंबई- रात 11:26 से 12:48 बजे तक

चेन्नई- रात 11:26 से 12:18 बजे तक

कोलकाता- रात 11:26 से 11:46 बजे तक

लखनऊ- रात 11:26 से 12:15 बजे तक

वाराणसी- रात 11:26 से 12:07 बजे तक

नोएडा- रात 11:26 से 12:29 बजे तक

कानपुर- रात 11:26 से 12:18 बजे तक

इलाहाबाद- रात 11:26 से 12:12 बजे तक

आगरा- रात 11:26 से 12:27 बजे तक

मथुरा- रात 11:26 से 12:28 बजे तक

जयपुर- रात 11:26 से 12:36 बजे तक

जोधपुर- रात 11:26 से 12:47 बजे तक

उदयपुर- रात 11:26 से 12:44 बजे तक

अहमदाबाद- रात 11:26 से 12:49 बजे तक

सूरत- रात 11:26 से 12:48 बजे तक

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भोपाल- रात 11:26 से 12:29 बजे तक

इंदौर- रात 11:26 से 12:36 बजे तक

हरिद्वार- रात 11:26 से 12:26 बजे तक

प्रयागराज- रात 11:26 से 12:12 बजे तक

पटना- रात 11:26 से 11:59 बजे तक

रांची- रात 11:26 से 11:58 बजे तक

होलिका दहन 2025: भद्रा का समय

13 मार्च को भद्रा पूंछ शाम 6:57 से रात 8:14 बजे तक रहेगा. इसके बाद भद्रा मुख का समय शुरू होगा, जो रात 10:22 बजे तक चलेगा. इसलिए, रात 10:22 बजे के बाद होलिका दहन करना शुभ रहेगा.

होलिका दहन मंत्र

अहकूटा भयत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै:

अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम

वंदितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्मणा शंकरेण च

अतस्त्वं पाहि मां देवी! भूति भूतिप्रदा भव

होलिका दहन 2025 पूजा-विधि

शुभ मुहूर्त में होलिका दहन स्थल पर गोबर से होलिका और प्रह्लाद की प्रतिमा बनाएं. लकड़ियों, उपलों और सूखे वृक्षों को जलाने के लिए इकट्ठा करें. पूजा के लिए जल, अक्षत, फूल, हल्दी, रोली, कुमकुम, नारियल और मिठाई रखें. गंगाजल छिड़ककर शुद्धिकरण करें और भगवान नारायण तथा होलिका का ध्यान करें. होलिका की तीन या सात बार परिक्रमा करें और पवित्र आहुति दें. पूजा समाप्त होने के बाद होलिका की अग्नि से घर लाकर तिलक करें.

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